हेलो, नमस्ते! स्वागत है आपका टेक्निकल प्रेशन चैनल के एक और वीडियो में। दोस्तों, क्या आप जानते हैं झारखंड के जिले में 71% आबादी अनुसूचित जनजातियों की है जो झारखंड में किसी भी जिले में सबसे ज्यादा है? इस जिले का इतिहास, भूगोल और अन्य रोचक बातें जानने के लिए हमारा आज का यह वीडियो अंत तक जरूर देखें।
सिमडेगा: एक नवगठित जिला
दोस्तों, सिमडेगा वैसे तो अधिक प्राचीन जिला नहीं क्योंकि पूरे झारखंड राज्य का अस्तित्व ही साल 2000 में बना था, इसलिए जिले के तौर पर इसकी पहचान 30 अप्रैल 2001 को सामने आई। इससे पहले यह स्थान गुमला जिले के अंतर्गत ही एक इकाई था। हालांकि, इस इलाके की बात करें तो इसका इतिहास बेहद समृद्ध है और यह कई शक्तिशाली राजवंशों के अधीन रह चुका है। यहां काफी समय तक मौर्य साम्राज्य का शासन रहा था जिसके बाद यहां गाजापति जैसे राजवंशों ने भी राज किया।
सिमडेगा: भौगोलिक स्थिति और प्रशासन
मौजूदा समय में यह जिला झारखंड के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित है और कुल 3774 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिसमें लगभग 32% वन क्षेत्र हैं। इसका मुख्यालय सिमडेगा शहर में है और सीमाएं उत्तर में गुमला, पूर्व में रांची एवं पश्चिम सिंहभूम, दक्षिण में उड़ीसा और पश्चिम में छत्तीसगढ़ राज्य से घिरी हुई हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख नदियां शंख, देव, गिरवा और पालमारा हैं।
सिमडेगा: जनसांख्यिकी और भाषा
वर्तमान में यहां 6.99 लाख की अनुमानित जनसंख्या रहती है जिसमें ज्यादातर आबादी ग्रामीण इलाकों में निवास करती है। यहां के लोग आमतौर पर सादरी, मुंडारी और खड़िया भाषा का प्रयोग करते हैं। जिले में 10 प्रखंड, दो विधानसभा और एक लोकसभा की सीट है। इस जिले का लिंगानुपात बेहद शानदार है। यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 1000 महिलाओं की संख्या है। वहीं अगर इसके साक्षरता दर को देखें तो यहां कुल 67.9% लोग साक्षर हैं, जिनमें 76.08% पुरुष और 59.92% महिलाएं पढ़ी लिखी हैं। इस जिले का आरटीओ कोड JH 20 है।
सिमडेगा: अर्थव्यवस्था
सिमडेगा की अर्थव्यवस्था पर नजर डालें तो यहां के निवासी अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से कृषि और वन उत्पादों पर निर्भर हैं। इस क्षेत्र की मुख्य फसल धान है। वहीं बाजार, सरसों, मक्का, गेहूं और मूंगफली आदि की भी खेती की जा रही है। यहां के मुख्य वन उत्पादों में महुआ, चिरौंजी, लाह, केंदु के पत्ते, जैकपॉट फल और ब्लैकबेरी इत्यादि शामिल हैं जो यहां के आदिवासी लोगों के जीने का आधार भी है।
सिमडेगा: पर्यटन स्थल
पर्यटन की दृष्टि से सिमडेगा अपने नदी, बांध, वन्यजीव अभयारण्य और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। हालांकि इसकी खूबसूरती से अधिकतर सैलानी अब तक अनजान हैं। यहां आप खूबसूरत प्रकृति के स्थल पालकोट वन्य जीव अभयारण्य देख सकते हैं जहां वनस्पतियों और जंगली जानवरों की दुर्लभ प्रजातियों को भी सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जाता है। साल, वाला, कुसुम और आम के पेड़ आपको यहां ज्यादा देखने को मिलेंगे। इसके अलावा आप यहां भवन पहाड़, केला घाघ डैम और प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल रेका धाम के भी दर्शन कर सकते हैं।
सिमडेगा: परिवहन
अब अगर आप भी इस जिले को घूमने चाहते हैं तो यहां आपको हवाई, रेल या सड़क सभी कनेक्टिविटी मिलेगी। यहां का निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची लगभग 75 किलोमीटर दूर है। वहीं सबसे पास का रेलवे स्टेशन भी राउरकेला ही है, जबकि सड़क मार्ग से आप NH 143 द्वारा यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।
तो दोस्तों, आज के लिए इतना ही। फिर मिलेंगे नेक्स्ट Blog में। तब तक के लिए जय हिंद, जय भारत।