दोस्तों, क्या आप जानते हैं उड़ीसा की टॉप टेन सिटीज कौन सी हैं? इन शहरों में क्या कुछ खास है और ये कैसे उड़ीसा राज्य को एक अलग पहचान देते हैं? अगर नहीं, तो हमारा यह आज का वीडियो आपके लिए ही है। तो आइए, इस वीडियो की शुरुआत करते हैं।
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1. भुवनेश्वर (Bhubaneswar)
पहले नंबर की बात करें तो उड़ीसा का सबसे महत्वपूर्ण शहर भुवनेश्वर है। यह पूरे राज्य की राजधानी होने के साथ ही भारत के उत्तर-पूर्व में एक महत्वपूर्ण व्यापार और धार्मिक केंद्र है। यह इलाका टेंपल सिटी के नाम से भी मशहूर है, जो पुरी और कोणार्क के साथ मिलकर स्वर्णिम त्रिभुज बनाता है। इतना ही नहीं, भुवनेश्वर में कुछ प्रतिष्ठित स्मारक और सुंदर प्राकृतिक आकर्षण भी हैं। यह शहर कुल 148 वर्ग किलोमीटर के एरिया में फैला हुआ है और इसकी जनसंख्या लगभग 12 लाख 61 हजार है।
इस इलाके की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि, आईटी और टूरिज्म से चलती है। यहां आपको आश्चर्यजनक मंदिरों तथा गुफाओं के साथ पुरी समुद्र तट और अन्य कई संस्कृत स्थान देखने को मिलते हैं।
2. कटक (Cuttack)
कटक भुवनेश्वर से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कटक पहले उड़ीसा की मूल राजधानी हुआ करता था जिसे पद्मावती भी कहते थे। इस शहर को उड़ीसा की संस्कृत और वाणिज्यिक राजधानी के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह हजार वर्षों के इतिहास और प्रसिद्ध चांदी का प्रमुख केंद्र है। इस शहर का कुल क्षेत्रफल 150 वर्ग किलोमीटर है जबकि यहां करीब 8,80,955 लोगों की आबादी रहती है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्यतः पर्यटन और वाणिज्य पर आधारित है।
यहां के उद्योगों में स्टील, बिजली, ऑटोमोबाइल, मिश्र धातु और फायर क्ले आदि शामिल हैं। कटक में ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जन्म लिया था जिनका घर वर्तमान समय में एक स्मारक के रूप में पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यहां सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का प्रसिद्ध गुरुद्वारा दातुन साहिब भी है।
3. राउरकेला (Rourkela)
राउरकेला सुंदरगढ़ में स्थित एक प्लांड सिटी है जो भुवनेश्वर और कटक के बाद उड़ीसा में तीसरा सबसे बड़ा शहरी समूह है। पहाड़ियों के साथ-साथ कोयला, शंख और ब्राह्मणी नदियों से घिरा ये शहर स्टील सिटी के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 स्मार्ट सिटी में से ही एक है। यह शहर 157 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बसा हुआ है और इसकी जनसंख्या लगभग 7,61,430 है। राउरकेला एक उच्च खनिज भंडार वाला क्षेत्र है जहां स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का सबसे बड़ा कारखाना स्थित है
जो भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का पहला एकीकृत स्टील प्लांट भी है। यह शहर पश्चिम उड़ीसा का शैक्षिक, तकनीकी और चिकित्सा अनुसंधान केंद्र भी है जहां पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों से छात्र उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आते हैं।
4. बेरहामपुर (Berhampur)
भारत के पूर्वी तट पर स्थित ये शहर समुद्री तटों और कई साहसिक स्थान के लिए बेहद ही प्रसिद्ध है। यह यहां की सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है और राज्य के साथ-साथ पूर्वी भारत के व्यापार और व्यापारिक केंद्र के लिए भी जाना जाता है। बेरहामपुर अपने स्ट्रीट फूड, सिल्क की साड़ियों या पट्टू साड़ियों, मंदिरों और कई ऐतिहासिक चीजों के लिए भी प्रसिद्ध है। इस शहर का कुल एरिया 79 वर्ग किलोमीटर है जबकि यहां की आबादी 4,95,190 है।
बेरहामपुर को उड़ीसा की खाद्य राजधानी और भारत के रेशम नगरी के रूप में भी जाना जाता है। बेरहामपुर अपनी अनूठी उड़िया संस्कृति के कारण राज्य की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है और इसने कई राष्ट्रीय स्तर के उड़िया और तेलुगु साहित्य सम्मेलनों का आयोजन किया है।
5. संबलपुर (Sambalpur)
उड़ीसा का संबलपुर देश और दुनिया में अपनी संबलपुरी साड़ियों के लिए बेहद मशहूर है। उड़ीसा के उत्तर-पश्चिम हिस्से में स्थित यह इलाका समृद्ध औद्योगीकरण के साथ ही एक गतिशील संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यह शहर अपने हस्तशिल्प उत्पादों व शिल्प कला के लिए भी जाना जाता है जिसकी झलक यहां के कण-कण में पर्यटकों को देखने को मिलती है। यह शहर 89 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी जनसंख्या 3,01,480 है।
ब्रिटिश शासन के दौरान यह क्षेत्र एक रियासत के तौर पर पहचाना जाता था जिसे स्वतंत्रता के बाद भारत गणराज्य में मिला दिया गया था। अब यह शहर अपने हरे-भरे जंगलों, नदी घाटी, पहाड़ों के साथ ही हीराकुंड बांध के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।
6. पुरी (Puri)
पुरी भारत का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह चार धाम यात्रा का एक प्रमुख स्थान है। कहा जाता है कि भारत में हिंदू तीर्थ यात्रा पुरी के दर्शन के बिना अधूरी है। बंगाल की खाड़ी पर खड़ा यह शहर जगन्नाथ मंदिर के कारण जगन्नाथ पुरी के नाम से भी बुलाया जाता है जो इस शहर को विश्व भर में एक अलग पहचान देता है। पुरी सांस्कृतिक तौर से बेहद समृद्ध है।
इसे भारत में सबसे अधिक आध्यात्मिक गेटवे में से एक माना जाता है। यह शहर आधुनिक जीवन शैली के साथ ही प्राचीन विरासतों को भी संजोए हुए हैं। इसका कुल क्षेत्रफल 16 वर्ग किलोमीटर है जबकि यहां 2 लाख लोगों की आबादी रहती है। यहां की अर्थव्यवस्था में होटल और ट्रैवल इंडस्ट्री का बहुत बड़ा योगदान है। रथ यात्रा के दौरान कम से कम 10 लाख लोग पुरी आते हैं।
7. बालेश्वर (Balasore)
बालेश्वर का वास्तविक नाम भगवान शिव के अंश बालेश्वर के नाम पर पड़ा जो मुगलों के दौर में बदल दिया गया और अब वर्तमान समय में बालेश्वर को बालेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर खासतौर पर अपने मंदिरों के लिए जाना जाता है जिसकी नक्काशी व वास्तुकला बेहद शानदार है। इसके अलावा यहां के लोक संस्कृति व पारंपरिक खानपान भी काफी प्रसिद्ध है और इसलिए मौजूदा समय में इसे उड़ीसा का आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है। यह शहर कुल 68 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जबकि इसकी वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 2,03,986 है।
बालेश्वर ने पिछले दो दशकों में प्रभावशाली आर्थिक विकास देखा है। कृषि, उद्योग, मछली पालन और पर्यटन यहां के लोगों के लिए आजीविका का साधन है। यह शहर मुख्य तौर पर चांदीपुर समुद्र तट के साथ-साथ चांदीपुर में होने वाले विभिन्न प्रकार के मिसाइल के परीक्षण के लिए भी प्रसिद्ध है।
8. भद्रक (Bhadrak)
भद्रक शहर का नाम मां भद्रकाली के नाम पर पड़ा है जिनका एक मंदिर यहां सलंदी नदी के किनारे स्थित है। यह शहर प्राचीन नहीं है और पहले बालेश्वर जिले का ही हिस्सा हुआ करता था जिसे साल 1993 में प्रशासनिक सुविधाओं के चलते एक अलग जिले का दर्जा मिला। इसका कुल क्षेत्रफल 178 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या 1,99,990 है। यह शहर कृषि प्रधान है और देश की अर्थव्यवस्था में भी खास योगदान है। यहां की ज्यादातर आबादी वैसे तो कृषि पर निर्भर है, लेकिन यहां कई कृषि उद्योग और स्वरोजगार का व्यापार भी है जो यहां के लोगों को आत्मनिर्भर बना रहा है। यह शहर तेजी से उड़ीसा का कमर्शियल सेंटर बनता जा रहा है।
9. बारीपदा (Baripada)
बारीपदा को दूसरे पुरी के रूप में भी जाना जाता है। यह शहर मुख्य रूप से अपनी सुंदर संस्कृति और प्राकृतिक दृश्य के लिए मशहूर है। बारीपदा की रथ यात्रा को भव्यता और धार्मिक उत्साह के मामले में पुरी की रथ यात्रा के बाद दूसरा माना जाता है। यहां कई ऐतिहासिक मंदिर भी हैं जिनकी वास्तुकला पर्यटकों को खास आकर्षित करती है। यह शहर कुल 37 वर्ग किलोमीटर में बसा है और यहां की अनुमानित जनसंख्या 1,18,630 है।
10. बलांगीर (Balangir)
उड़ीसा का बलांगीर जिला एक समृद्ध संस्कृत विरासत वाला एक महत्वपूर्ण व्यवसायिक केंद्र है। यह स्थान कई पुराने मंदिरों, तीर्थ स्थलों और प्राचीन काल से यहां रहने वाले स्वदेशी जनजातियों के लिए खास लोकप्रिय है। इस जिले का क्षेत्र कभी तत्कालीन पटना राज्य का हिस्सा हुआ करता था।
इस शहर का कुल एरिया 31 वर्ग किलोमीटर है और यहां 1,35,588 लोगों की आबादी रहती है। यहां के ज्यादातर लोग कृषि के साथ ही कपड़ा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों सहित कई छोटे-मझोले उद्योगों पर निर्भर हैं। यहां की संस्कृति यहां के त्योहार में नजर आती है, जिसे यहां के लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। शीतल षष्ठी, नुस्खे भाई, घंटियां यात्रा यहां मनाए जाने वाले कुछ प्रसिद्ध त्यौहार हैं।
तो दोस्तों, आप इनमें से कौन से शहर से बिलॉन्ग करते हैं, हमें कमेंट में जरूर बताना। तो चलिए, फिर मिलेंगे में। तब तक के लिए जय हिंद, जय भारत!